Sunday, November 27, 2022

केले में लगने वाले रोग से परेशान हैं किसान तो तुरंत करें ये उपाय, मिलेगी बंपर पैदावार

केला एक ऐसा फल है जिसी खेती हर राज्य में की जाती है. क्योंकि केले की फसल किसानों के लिए फायदे की खेती मानी जाती है. खास कर बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, आंध्र प्रदेश और केरल सहित कई राज्यों में केली की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. ऐसे में किले में लगने वाले रोगों के बारे में भी किसानों को जरूर जानकारी होनी चाहिए. ऐसी ही एक बीमारी का नाम श्रोट चॉकिंग (गला घुटना ) है.

दरअसल, केला के फल का गुच्छा सामान्य तरीके से न निकल कर कभी- कभी आभासी तने को फाड़ते हुए असामान्य तरीके से निकलते हुए दिखाई देता है. उसे ही थ्रोट चॉकिंग( गला घोंटना ) कहते हैं. केले का यह एक शारीरिक विकार है. वरिष्ठ फल वैज्ञानिक डाक्टर एसके सिंह ने टीवी9 भारतवर्ष के जरिए केला की खेती करने वाले किसानों को इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक सुझाव दिए हैं.

खास बात यह है कि उत्तर भारत के केले में इस विकार की समस्या ज्यादा है. यह विकार भयावह रूप तब धारण कर लेता है, जब केले की रोपाई बिहार एवं उत्तर प्रदेश में सितम्बर महीने में या उसके बाद करते हैं. यह विकार बौनी प्रजाति के केलों में लंबी प्रजाति की तुलना में अधिक लगता है.

इस बीमार से बचने के लिए किसानों को केले की लंबी प्रजाति के किस्मों का चयन चरना चाहिए, जो चोक के प्रति कम संवेदनशील हों. जैसे, अल्पान, चंपा, चीनी चंपा, मालभोग, कोठिय, बत्तिसा इत्यादि. साथ ही केले की रोपाई सही समय पर करें.

वहीं, केला की खेती के लिए बेहतर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें. जलभराव के प्रभाव को कम करने के लिए केले के खेत में उचित जल निकास का प्रबंध वहीं, केले की खेती के लिए बेहतर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें. जलभराव के प्रभाव को कम करने के लिए केले के खेत में उचित जल निकास का प्रबंध करें. विशेष रूप से गर्म-शुष्क मौसम में पानी की कमी से बचने के लिए नियमित सिंचाई करें.

नोट: इस लेख में दी गई सभी जानकारी केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखी गई है।

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