Sunday, November 27, 2022

अदरक की खेती से किसान हो जाएंगे मालामाल, ये है फार्मिंग का वैज्ञानिक तरीका, जानें कौन सी किस्म है अच्छी

भारत में खेती का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में सबसे पहले धान और गेहूं की याद आती है. लोगों को लगता है कि धान और गेहूं के साथ- साथ दलहन और तिलहन ही इस तरह की फसल है जिसे किसान बड़े पैमाने पर खेती करते हैं और मालामाल हो जाते हैं. पर हम आपको बता देना चाहते हैं कि इन फसलों के अलावा भी और कई तरह की ऐसी खेती है जिसे कर किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैं और इसमें लागत भी कम होती है. जी जहां! दरअसल आज हम बात करने जा रहे हैं अदरक की खेती. अदरक एक ऐसी फसल है जिसकी खेती पूरे भारत में की जाती है. इसका उपयोग सब्जी से लेकर चाय बनाने तक में किया जाता है. सब्जी में लहसुन के साथ अदरक के पेस्ट बनाकर डालने से उसका स्वाद लाजवाब हो जाता है. वहीं, चाय में अदर के प्रयोग से यह दवाई बन जाती है.

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अदरक मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र की फसल है. अदरक शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के स्ट्रिंगवेरा से हुई है, जिसका अर्थ है, एक सींग या बारह सिंध जैसा शरीर. अदरक का उपयोग प्राचीन काल से मसाले, ताजी सब्जी और औषधि के रूप में किया जाता रहा है. अब अदरक का उपयोग सजावटी पौधे के रूप में भी किया जाने लगा है. भारत में अदरक की खेती का क्षेत्रफल 136 हजार हेक्टेयर है. यह भारत विदेशी मुद्रा का एक प्रमुख स्रोत है. भारत दुनिया में उत्पादित आधे अदरक की आपूर्ति करता है. भारत में हल्की अदरक की खेती मुख्य रूप से केरल, उड़ीसा, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में की जाती है.

अदरक का उपयोग सोंठ के रूप में किया जाता है

अदरक का उपयोग दवाई, सौंदर्य सामग्री और मसाले के रूप में किया जाता रहा है. साथ ही अदरक से स्वादिष्ट अचार भी बनाया जाता है. वहीं, सर्दी और खांसी होने पर अदरक की चाय पीने से आदमी स्वस्थ हो जाता है. इसके अलावा अदरक का उपयोग सोंठ के रूप में किया जाता है. इसी तरह कच्चा अदरक और सोंठ का प्रयोग चटनी, जेली, सब्जी, शर्बत, लड्डू और चाट में भी मसाले के रूप में किया जाता है.

एक हेक्टेयर में 15 से 20 टन अदरक प्राप्त होता है

अदरक की खेती गर्म और आर्द्र स्थानों में की जाती है. अदरक के प्रकंद बनने के लिए बुवाई के समय मध्यम वर्षा की आवश्यकता होती है. इसके बाद पौधों की वृद्धि के लिए थोड़ी और बारिश की आवश्यकता होती है और इसकी खुदाई से एक महीने पहले शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है. 1500-1800 मिमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी उपज के साथ इसकी खेती की जा सकती है. लेकिन उचित जल निकासी के बिना स्थानों में कृषि को भारी नुकसान होता है. गर्मियों में औसत तापमान 25 डिग्री सेंटीग्रेड, 35 डिग्री सेंटीग्रेड वाले स्थानों पर बागों में अंतरफसल के रूप में इसकी खेती की जा सकती है. खास बात यह है कि अदरक की खेती छोटी जोत वाले किसान भी आसानी से कर सकते हैं. इसकी फसल को तैयार होने में 7 से 8 महीने में लग जाते हैं. आप प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन अदरक प्राप्त कर सकते हैं. ऐसे में सारी लागत निकालने के बाद किसानों को अदरक की खेती से प्रति हेक्टेयर करीब दो लाख रुपये का फायदा हो जाता है.

मार्च और अप्रैल महीने में होती है खेत की जुताई

बता दें कि अदरक की खेती करने से पहले किसानों को खेत को पूरी अच्छी तरह से तैयार करना पड़ता है. मार्च और अप्रैल महीने में खेती को अच्छी से जुताई करना पड़ती है. इसके बाद मिट्टी को धूप में सूखने के लिए कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है. फिर, मई महीने में खेत की डिस्क हैरो या रोटावेटर से जोताई की जाती है. इससे मिट्टी को भुरभुरा हो जाती है. फिर, खेत को पूरी तरह से तैयाकर करने के अदरक के कंद की बुवाई की जाती है.

नोट: इस लेख में दी गई सभी जानकारी केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखी गई है।

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