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Tuesday, February 7, 2023

Akshaya Tritiya 2023: अक्षय तृतीया के दिन बन रहा है शुभ योग, धन की होगी वृद्धि


Akshaya Tritiya 2023: 
हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतिया मनाने की परंपरा है. अक्षय तृतीया का मतलब है, जिसका क्षय न हो सके. इस दिन को अखा तीज के नाम से भी जाना जाता है. अक्षय तृतीया के दिन विवाह करना, सोना खरीदना, कोई वाहन खरीदना या फिर मकान खरीदना बेहद शुभ होता है. इस दिन कोई भी कार्यों को करने से उसका दोगुना फल मिलता है. अक्षय तृतीया के दिन अबूझ मुहूर्त होता है. इस दिन महायोग बन रहा है.इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करना चाहिए. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि अक्षय तृतीया कब है, पूजा मुहूर्त क्या है, इस दिन कौन सा महायोग बन रहा है, इस दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है, इसके अलावा इस दिन मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

कब है अक्षय तृतीया 
इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि दिनांक 22 अप्रैल 2023 दिन शनिवार को अक्षय तृतीया है. इस तिथि का शुभ मुहूर्त दिन शनिवार को सुबह 07:49 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 07:47 तक रहेगा. 

अक्षय तृतीया का शुभ पूजा मुहूर्त क्या है?
अक्षय तृतीया के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07:49 मिनट से लेकर दोपहर 12:20 मिनट तक रहेगा. इस दिन अक्षय तृतीया का शुभ पूजा मुहूर्त साढ़े चार घंटे तक ही है. 

अक्षय तृतीया के दिन बन रहा है महायोग 
-दिनांक 22 अप्रैल 2023 को अक्षय तृतीया के दिन 6 शुभ योग बन रहा है. इस दिन शुभ आयुष्मान योग भी सुबह 09:26 मिनट तक है. उसके बाद से सौभाग्य योग शुरु हो जाएगा.
-अक्षय तृतीया पर त्रिपुष्कर योग सुबह 05:49 मिनट से लेकर सुबह 07:49 तक रहेगा. 
– इस दिन रवि योग रात में 11:24 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 05:48 मिनट तक रहेगा. 

सोना खरीदारी के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त 
दिनांक 22 अप्रैल 2023 को अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त सुबह 07:49 मिनट से लेकर अगले दिन सुबह 05:48 मिनट तक रहेगा. 

मांगलिक कार्यों के लिए ये हैं शुभ मुहूर्त 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन आप सभी मांगलिक कार्य करवा सकते हैं. इस दिन पूरे दिन शुभ मुहूर्त है. आप इस दिन कोई भी शुभ काम आप बिना समय देखे कर सकते हैं. पूरे दिन स्वयं सिद्ध मुहूर्त रहता है.  

नोट: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यता और लोक मान्यता पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं भी हो सकता। सामान्य हित और ज्ञान को ध्यान में रखते हुए यहां इसे प्रस्तुत किया जा रहा है।

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